4 नावों की सवारी और डूबने का डर: मल्टीपल एग्जाम्स को एक साथ कैसे हैंडल करें?
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सीधा पॉइंट पर आते हैं। इंडिया में 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद शायद ही कोई ऐसा बच्चा होगा जो सिर्फ एक फॉर्म भरता हो।
साइंस वाले बच्चे का रूटीन कुछ ऐसा दिखता है: बोर्ड्स भी देने हैं, JEE भी ट्राई करना है, बैकअप के लिए CUET का फॉर्म भी भर दिया है, और किसी ने कह दिया तो NDA भी दे आएंगे। वहीं, गवर्नमेंट जॉब की तैयारी करने वालों का हाल ये है कि वो SSC CGL, Bank PO, रेलवे (RRB) और अपने स्टेट का PCS… जो भी फॉर्म निकलता है, सब भर देते हैं। इसे कहते हैं “Fear Of Missing Out” (FOMO)।
लेकिन प्रॉब्लम यह है कि जब आप एक ही दिन में 4 अलग-अलग एग्जाम्स का सिलेबस निपटाने की कोशिश करते हैं, तो दिमाग का ‘रायता’ बन जाता है। आख़िर में होता यह है कि एक भी एग्जाम का कट-ऑफ़ क्लियर नहीं होता।
अगर आपको मल्टीपल एग्जाम्स को एक साथ क्रैक करना है, तो आपको गधों वाली मेहनत छोड़कर ये 4 स्मार्ट और प्रैक्टिकल रूल्स फॉलो करने होंगे:
1. अपना ‘अल्फ़ा’ (Alpha) एग्जाम चुनो (द 80/20 रूल)
आप एक ही टाइम पर तीन एग्जाम्स को अपना 100% नहीं दे सकते। यह प्रैक्टिकली इम्पॉसिबल है। आपको अपना एक ‘प्राइमरी’ (मेन) एग्जाम चुनना ही होगा, और बाकी एग्जाम्स को ‘सेकेंडरी’ (बैकअप) मानना होगा।
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स्ट्रैटजी: अपने दिन का 80% टाइम और एनर्जी सिर्फ अपने प्राइमरी एग्जाम को दें। बचे हुए 20% टाइम में बैकअप एग्जाम के वो टॉपिक्स पढ़ें जो मेन एग्जाम में नहीं आते।
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एग्जांपल: अगर आपका मेन फोकस SSC CGL है और बैंक PO बैकअप है, तो अपना 80% टाइम SSC की मैथ्स, इंग्लिश और GK को दें। बैंक PO में जो एक्स्ट्रा आता है (जैसे टफ पज़ल्स या बैंकिंग अवेयरनेस), उसे सिर्फ वीकेंड्स (Saturday/Sunday) के लिए रखें।
2. सिलेबस का ‘वेन डायग्राम’ (Venn Diagram) बनाओ
स्मार्टनेस इसमें नहीं है कि आप 3 अलग-अलग एग्जाम्स के लिए 3 अलग-अलग किताबें खरीदें। सबसे पहले उन एग्जाम्स का कॉमन सिलेबस ढूंढिए।
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हैक: 70% से 80% सिलेबस हर एग्जाम में ओवरलैप (Overlap) करता है। क्वांट (Maths), इंग्लिश और बेसिक GK लगभग हर जगह सेम है।
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जो सिलेबस कॉमन है, उसे किसी एक स्टैंडर्ड लेवल से तैयार कर लें। अगर आपने SSC लेवल की मैथ्स पढ़ ली है, तो रेलवे या स्टेट एग्जाम्स की मैथ्स अपने आप कवर हो जाएगी; उसके लिए अलग से पढ़ने की ज़रूरत नहीं है।
3. ‘कॉन्टेक्स्ट स्विचिंग’ से बचो
सुबह 2 घंटे SSC की मैथ्स लगा ली, दोपहर में CUET की हिस्ट्री खोल ली, और शाम को बैंक की रीजनिंग पढ़ने बैठ गए। यह टाइम मैनेजमेंट का सबसे बड़ा डिज़ास्टर है।
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ह्यूमन ब्रेन को एक सब्जेक्ट से पूरी तरह दूसरे सब्जेक्ट में शिफ्ट (Context Switch) होने में लगभग 20 मिनट लगते हैं। जब आप बार-बार सब्जेक्ट बदलते हैं, तो आपका दिमाग थक जाता है।
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फिक्स: एक दिन में मैक्सिमम 2 या 3 सब्जेक्ट्स ही रखें। सोमवार से शुक्रवार (Mon-Fri) सिर्फ अपने कॉमन और प्राइमरी सिलेबस पर फोकस करें। अपने बैकअप एग्जाम्स की तैयारी को सिर्फ शनिवार और रविवार के लिए रिज़र्व कर दें।
4. बैकअप एग्जाम्स ‘किताबों’ से नहीं, ‘मॉक टेस्ट्स’ से निकलते हैं
अगर आपका मेन एग्जाम (जैसे JEE) अभी 3 महीने दूर है, लेकिन बीच में NDA का एग्जाम आ गया है, तो NDA के लिए कोई नई किताब या नया क्रैश कोर्स मत खरीदिए!
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जो एग्जाम आपका बैकअप है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ मॉक टेस्ट्स (Mock Tests) और प्रीवियस ईयर पेपर्स (PYQs) सॉल्व करें।
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अगर आप एग्जाम से पहले उस बैकअप एग्जाम के 15-20 फुल-लेंथ मॉक लगा लेते हैं और उनके सॉल्यूशंस का एनालिसिस कर लेते हैं, तो आप बिना कोई एक्स्ट्रा किताब पढ़े उस एग्जाम का कट-ऑफ़ पार कर सकते हैं।